जयपुर: 25 फरवरी 2026 राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने आज दोपहर कैबिनेट बैठक में ऐतिहासिक फैसला लिया है। राजस्थान पंचायती राज संशोधन बिल 2026 और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस संशोधन के बाद अब दो से ज्यादा संतान (तीन, चार या उससे अधिक बच्चे) वाले व्यक्ति भी पंचायती राज संस्थाओं (सरपंच, उप-सरपंच, प्रधान, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य आदि) और शहरी निकायों (पार्षद, मेयर, डिप्टी मेयर, चेयरपर्सन आदि) के चुनाव लड़ सकेंगे। पहले यह नियम उन्हें अयोग्य घोषित कर देता था।
कब से था यह नियम?
यह प्रावधान 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत की बीजेपी सरकार ने लागू किया था। उस समय जनसंख्या वि*स्फोट को रोकने के लिए 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरा बच्चा होने पर उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से अयोग्य माना जाता था। नियम पंचायती राज अधिनियम की धारा 19 और नगरपालिका अधिनियम की धारा 24/26 में था। मकसद था जनसंख्या नियंत्रण, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है, सरकार का कहना है कि पहले जैसा दबाव नहीं रहा।
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में की पुष्टि:
“कैबिनेट ने दोनों संशोधन बिलों को हरी झंडी दे दी है। इन बिलों को इसी बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा और पारित होने पर तुरंत प्रभावी हो जाएंगे। अब योग्यता रखने वाले उम्मीदवार, चाहे उनके बच्चे कितने भी हों, चुनाव लड़ सकेंगे।”
क्या प्रभाव पड़ेगा?
आगामी पंचायत-निकाय चुनाव 2026 में कई ऐसे नेता/उम्मीदवार मैदान में आ सकेंगे जो पहले अयोग्य थे। ग्रामीण और शहरी इलाकों में परिवार-आधारित राजनीति को और बल मिल सकता है।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला वोट बैंक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
ध्यान दें: शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता पहले से ही नहीं है (सरकार ने स्पष्ट किया था कि अनपढ़ भी लड़ सकते हैं)।
यह फैसला राजस्थान की स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर ला सकता है। चुनावी तैयारियां अब और तेज हो जाएंगी!


