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अपनी ही योजना से मंत्री को ₹99.60 लाख, IAS अधिकारी के परिवार को ₹1.16 करोड़ की सब्सिडी!

नई दिल्ली: क्या कोई केंद्रीय मंत्री (Union Minister) अपने ही मंत्रालय (Ministry) के अधीन चलने वाली योजना का लाभार्थी (Beneficiary) बन सकता है? क्या किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी के परिवार को उसी सरकारी योजना से करोड़ों रुपये की सब्सिडी मिलना केवल संयोग है, या यह हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला है?

The Indian Express की दो-भागीय खोजी रिपोर्ट ने इसी सवाल को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।

Bhagirath Choudhary Gets ₹99.60 Lakh; IAS Naresh Pal Gangwar's Family Gets ₹1.16 Crore Vikalp Times

मंत्री को अपने ही मंत्रालय की योजना से ₹99.60 लाख:

रिपोर्ट के अनुसार, MP Bhagirath Choudhary, जो केंद्र सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री (Minister of State for Agriculture and Farmers Welfare) हैं, को राजस्थान (Rajasthan) के डीडवाना-कुचामन (Didwana Kuchaman) जिले के पीह गांव स्थित अपने व्यावसायिक खीरा (Cucumber) प्रोजेक्ट के लिए ₹99.60 लाख की सब्सिडी (Subcidy) मिली।

यह सब्सिडी National Horticulture Board (NHB) की “Development of Commercial Horticulture through Production and Post-Harvest Management of Horticulture Crops” योजना के तहत दी गई, जो Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) का हिस्सा है। योजना के तहत परियोजना लागत का अधिकतम 50% (एक परिवार को अधिकतम ₹1 करोड़) तक अनुदान दिया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार:

परियोजना लागत लगभग ₹1.99 करोड़ थी।
इसके लिए ₹1.49 करोड़ का बैंक ऋण लिया गया।
मार्च 2026 में अंतिम मंजूरी के बाद ₹99.60 लाख सीधे ऋण खाते में जमा किए गए।
यह परियोजना 2025 में स्वीकृत 467 परियोजनाओं में शामिल थी।

विवाद क्यों?

यहीं से विवाद शुरू होता है।

NHB के बोर्ड में केंद्रीय कृषि मंत्री पदेन (Ex-Officio) अध्यक्ष और कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष (Ex-Officio Vice-President) होते हैं। इस नाते भगीरथ चौधरी स्वयं उसी बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं जिसके अधीन यह योजना संचालित होती है। हालांकि योजना की अंतिम स्वीकृति एक अलग प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी देती है, जिसमें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष सदस्य नहीं होते।

विवाद बढ़ने पर भगीरथ चौधरी ने कहा:

उन्होंने 2018 में आवेदन किया था, जब वे मंत्री नहीं थे। उन्होंने सभी नियमों का पालन किया। उन्होंने कोई तथ्य नहीं छिपाया। वे बचपन से किसान हैं और अन्य पात्र किसानों की तरह ही योजना का लाभ लिया।

IAS अधिकारी के परिवार को ₹1.16 करोड़

इसी जांच में दूसरा बड़ा खुलासा वरिष्ठ IAS अधिकारी Naresh Pal Gangwar से जुड़ा है।

नरेश पाल गंगवार वर्तमान में भारत सरकार के मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में सचिव (Secretary, Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying) हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, उनके परिवार के तीन सदस्यों को NHB योजना के तहत अलग-अलग वर्षों में कुल ₹1.16 करोड़ से अधिक की सब्सिडी मिली।

किसे कितनी सब्सिडी?

माता बिंदुमती – लगभग ₹46.03 लाख
पुत्र कुमार ऋत्विक – लगभग ₹46.49 लाख
पत्नी डॉ. रंजिता सिंह – लगभग ₹24.36 लाख

सभी परियोजनाएं राजस्थान में व्यावसायिक बागवानी (Commercial Horticulture) से जुड़ी बताई गई हैं।

IAS नरेश पाल गंगवार ने कहा:

उनकी माता और पुत्र उन पर आश्रित (Dependent) नहीं हैं। इसलिए AIS (Conduct) Rules, 1968 के तहत उनकी संपत्तियों या परियोजनाओं का खुलासा करना आवश्यक नहीं था। उन्होंने नियमों के अनुसार आवश्यक घोषणाएं की हैं। असली सवाल कानून का नहीं, नैतिकता का?

इस पूरे मामले में अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि नियमों का उल्लंघन हुआ है। लेकिन सार्वजनिक जीवन में Conflict of Interest केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिक प्रश्न भी होता है। Code of Conduct for Ministers मंत्रियों से अपेक्षा करता है कि वे ऐसी परिस्थितियों से बचें जहाँ निजी हित और सार्वजनिक दायित्व के बीच टकराव दिखाई दे। इसी तरह AIS (Conduct) Rules भी सरकारी अधिकारियों से पारदर्शिता, निष्पक्षता और निजी हितों के उचित प्रकटीकरण की अपेक्षा करते हैं।

सबसे बड़ा सवाल:

अगर एक निम्न वेतनभोगी सरकारी कर्मचारी नौकरी के साथ छोटा-सा निजी व्यवसाय करने पर Conduct Rules के दायरे में आ सकता है, तो-

क्या मंत्री अपने ही मंत्रालय की योजना से सब्सिडी लें?
क्या वरिष्ठ नौकरशाहों के परिवार उसी योजना के बड़े लाभार्थी बनें?
और फिर भी कोई स्वतंत्र जांच न हो?

लोकतंत्र में जवाबदेही केवल कानून से नहीं, जनविश्वास से भी तय होती है।

यही कारण है कि इस मामले में उठ रहे सवाल केवल ₹99.60 लाख या ₹1.16 करोड़ के नहीं, बल्कि शासन में पारदर्शिता, नैतिकता और सार्वजनिक विश्वास के हैं।

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Christina Kayla

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