कोटा: कोटा (Kota) के सबसे बड़े सरकारी एमबीएस अस्पताल (MBS Hospital Kota) की इमरजेंसी सेवाएं एक बार फिर विवादों में आ गई हैं। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 55 वर्षीय महिला को 108 एंबुलेंस जिंदा हालत में अस्पताल लाया गया, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने के आरोपों के बीच उसकी मौ*त हो गई। मृ*तका की पहचान रणोदिया निवासी उर्मिला बाई के रूप में हुई है।

बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह गणेशगंज क्षेत्र के पास सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें इटावा सीएचसी से कोटा के एमबीएस अस्पताल रेफर किया गया था। 108 एंबुलेंस में तैनात EMT लीलाधर पारेता के मुताबिक महिला को पूरे रास्ते ऑक्सीजन सपोर्ट और फ्लूड दिया गया। करीब 11:30 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद इमरजेंसी गेट पर स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं था।
आरोप है कि स्ट्रेचर देने से पहले अस्पताल स्टाफ ने आधार कार्ड मांगा। बाद में किसी तरह महिला को अंदर पहुंचाया गया। एंबुलेंसकर्मी का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने मरीज को तुरंत उपचार देने के बजाय सर्जरी डॉक्टर का इंतजार करने को कहा। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही। ऑक्सीजन और मॉनिटर लगाने की गुहार के बावजूद समय पर व्यवस्था नहीं हुई और आखिरकार महिला ने द*म तोड़ दिया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा और उपाधीक्षक डॉ. कर्णेश गोयल मौके पर पहुंचे। अधीक्षक ने लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए स्टाफ को फटकार लगाई और इमरजेंसी गेट पर स्ट्रेचर की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि इससे पहले भी एमबीएस अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं को लेकर सवाल उठ चुके हैं। मार्च महीने में भी इलाज में देरी के दौरान एक बुजुर्ग मरीज की मौ*त का मामला सामने आया था।

