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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी बैठक, वंदे मातरम् और UCC पर बोर्ड का कड़ा रुख

All India Muslim Personal Law Board's executive committee meeting concludes Vande Mataram UCC Vikalp Times

 देश और मुस्लिम समुदाय की मौजूदा परिस्थितियों पर अहम निर्णय

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) की हाल ही में आयोजित कार्यकारिणी बैठक में देश और मुस्लिम समुदाय (Muslim Community) की वर्तमान परिस्थितियों का विस्तृत आकलन किया गया तथा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

All India Muslim Personal Law Board's executive committee meeting concludes Vande Mataram UCC Vikalp Times

ये निर्णय विशेष रूप से भाजपा (BJP) शासित राज्यों में मुसलमानों (Muslim) के विरुद्ध बढ़ रही भीड़ हिं*सा (लिं*चिंग), मस्जिदों (Masjid) और मदरसों (Madrasa) पर की जा रही ध्वंसात्मक कार्रवाइयों, मुसलमानों के घरों और बस्तियों पर बुलडोज़र अभियान, सरकारी कार्यक्रमों, विद्यालयों एवं सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में वंदे मातरम् (Vande Mataram) को अनिवार्य बनाने के प्रयासों, विभिन्न राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) (UCC) लागू करने की दिशा में हो रही प्रगति तथा कमाल मौला/भोजशाला मस्जिद से संबंधित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) के हालिया निर्णय के संदर्भ में लिए गए हैं। कार्यकारिणी ने देश और मुस्लिम समुदाय की लगातार बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों की जान-माल, इज्जत-आबरू, मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान, पर्सनल लॉ, मौलिक अधिकार, बल्कि उनका ईमान और धार्मिक आस्था भी लगातार हमलों का निशाना बन रही है।

पूरे देश में नफरत, भेदभाव और सांप्रदायिक तनाव का माहौल सुनियोजित तरीके से तैयार किया जा रहा है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस वातावरण को बढ़ावा देने वालों में भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ-साथ सरकार के जिम्मेदार लोग भी शामिल दिखाई देते हैं, जबकि नफरत फैलाने वाले भाषणों और उकसावे की घटनाओं के विरुद्ध कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती। कार्यकारिणी ने इस बात पर भी खेद जताया कि मुस्लिम समुदाय की जान-माल, सम्मान, धर्म और आस्था पर योजनाबद्ध हमलों के बावजूद धर्मनिरपेक्ष (Secular) राजनीतिक दल चुप्पी साधे हुए हैं, मानो मुसलमान केवल एक वोट बैंक (Vote Bank) बनकर रह गए हों।

कार्यकारिणी ने निर्णय लिया कि मुस्लिम समुदाय की बिगड़ती स्थिति, बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और मौलिक अधिकारों के हनन से संबंधित एक व्यापक दस्तावेज तैयार कर प्रकाशित किया जाएगा, ताकि देश के जागरूक, न्यायप्रिय और लोकतांत्रिक मूल्यों (Democratic values) में विश्वास रखने वाले लोगों के विवेक को झकझोरा जा सके। बोर्ड (AIMPLB) ने स्पष्ट किया कि देश के दूसरे सबसे बड़े समुदाय के अधिकारों का हनन केवल एक समुदाय का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव और विकास प्रक्रिया पर पड़ता है।

इस दृष्टि से यह पूरे देश के लिए नुकसानदेह है। कमाल मौला मस्जिद/भोजशाला प्रकरण के संबंध में कार्यकारिणी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक प्रमाणों, राजस्व अभिलेखों, औपनिवेशिक कालीन सरकारी दस्तावेजों तथा सदियों पुरानी मुस्लिम इबादत की परंपरा के विपरीत है। इसके अतिरिक्त यह फैसला पूजा स्थलों से संबंधित अधिनियम, 1991 (Places of Worship Act, 1991) की भावना के भी प्रतिकूल है। कार्यकारिणी ने इस बात का स्वागत किया कि कमाल मौला मस्जिद कमेटी ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है तथा यह तय किया कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस कानूनी लड़ाई में मस्जिद कमेटी को हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।

कार्यकारिणी ने वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने के प्रयासों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के विपरीत बताया। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार इस संबंध में ऐसा कोई कदम उठाती है जिसके परिणामस्वरूप संसद के माध्यम से सभी नागरिकों अथवा स्कूली विद्यार्थियों के लिए वंदे मातरम् का पाठ अनिवार्य किया जाता है, तो बोर्ड इसके खिलाफ न्यायालय की शरण लेगा। इसी प्रकार, कार्यकारिणी ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा विद्यालयों तथा सरकारी सहायता प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त मदरसों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के निर्णय को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले बिजोए इमैनुएल बनाम केरल राज्य (1986) के विरुद्ध बताया तथा इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। कार्यकारिणी ने कलकत्ता हाई कोर्ट (Kolkata High Court) के उस अंतरिम आदेश का स्वागत किया, जिसमें मदरसों में वंदे मातरम् गाने को अनिवार्य बनाने वाली सरकारी अधिसूचना पर रोक लगाई गई है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना है कि अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक मान्यताओं और भावनाओं की उपेक्षा करते हुए मदरसों में वंदे मातरम् गाना अनिवार्य नहीं किया जा सकता तथा यदि कोई मदरसा या छात्र ऐसा नहीं करता है तो उसके विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई भी नहीं की जा सकती। कार्यकारिणी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वंदे मातरम् एक शिर्किया गीत है, जिसके कुछ अंश मुसलमानों के तौहीद के अकीदे के विरुद्ध हैं। इसलिए मुसलमानों के लिए इसका पाठ करना शरीअत की दृष्टि से उचित नहीं है। बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की कि वे सहिष्णुता या देशभक्ति के नाम पर अपने ईमान और अकीदे से किसी प्रकार का समझौता न करें। कार्यकारिणी ने भाजपा शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर चल रहे विधायी प्रयासों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। बैठक में कहा गया कि उत्तराखंड (Uttarakhand) और गुजरात (Gujarat) के बाद अब असम (Assam), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी यूसीसी लागू करने की तैयारी की जा रही है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड कोई ऐसा अनिवार्य संवैधानिक प्रावधान नहीं है, जिसे लागू करने के लिए अदालतें बाध्य हों, बल्कि यह संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों (Directive Principles of State Policy) में शामिल एक गैर-बाध्यकारी मार्गदर्शक सिद्धांत है। इसके अलावा यूसीसी को जबरन लागू किया जाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विरुद्ध है और देश की बहुलतावादी एवं विविधतापूर्ण सामाजिक संरचना के भी अनुकूल नहीं है। कार्यकारिणी ने निर्णय लिया कि जिस प्रकार बोर्ड ने उत्तराखंड सरकार के यूसीसी कानून को नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी है, उसी प्रकार अन्य राज्यों में भी ऐसे कानूनों के विरुद्ध कानूनी कदम उठाए जाएंगे। कार्यकारिणी ने यह भी निर्णय लिया कि मुसलमानों को सामाजिक और राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलने, संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन, नफरत और वैमनस्य के प्रसार, सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने, मुसलमानों की जान-माल और सम्मान पर हमलों तथा मस्जिदों और मदरसों के ध्वंस के विरुद्ध ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश के न्यायप्रिय, लोकतंत्र समर्थक और अमन-पसंद वर्गों को साथ लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक एक्शन कमेटी का गठन किया जा रहा है।

बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी (Maulana Khalid Saifullah Rahmani) ने की, जबकि कार्यवाही का संचालन बोर्ड के महासचिव मौलाना फज़लुर्रहीम मुजद्दिदी (Maulana Fazlur Rahim Mujaddidi) ने किया। बैठक में देशभर से कार्यकारिणी के सदस्यों ने भाग लिया, जिनमें विशेष रूप से उपाध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani), अध्यक्ष जमीयत उलेमा-ए-हिंद, मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी (Maulana Ubaidullah Khan Azmi), पूर्व सांसद, सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी (Syed Saadatullah Husaini), अमीर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, मौलाना असगर इमाम मेहदी (Maulana Asghar Imam Mehdi), अध्यक्ष मरकज़ी जमीयत अहले हदीस, सचिव मौलाना उमरैन महफूज़ रहमानी (Maulana Umrain Mahfooz Rahmani) एवं मौलाना यासीन अली उस्मानी (Maulana Yaseen Ali Usmani), राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास (Dr. S. Q. R. Ilyas), वरिष्ठ अधिवक्ता जनाब यूसुफ हातीम मुच्छाला (Yusuf Hatim Muchhala) एवं एम. आर. शमशाद (M. R. Shamshad), महिला प्रकोष्ठ की संयोजक एडवोकेट जलीसा सुल्ताना (Advocate Jalisa Sultana), बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी (Barrister Asaduddin Owaisi), सांसद जनाब आरिफ मसूद (Arif Masood), मौलाना अबू तालिब रहमानी (Maulana Abu Talib Rahmani), मौलाना सज्जाद नोमानी (Maulana Sajjad Nomani) तथा मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली (Maulana Khalid Rasheed Farangi Mahali) सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

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Christina Kayla

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